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बिहार के औरंगाबाद में उतर से लेकर दक्षिण तक लगा भूतों का मेला

ByFocus News Ab Tak

Oct 6, 2022

ब्यूरो रिपोर्ट

बिहार के औरंगाबाद में उतर से लेकर दक्षिण तक लगा भूतों का मेला, भूत प्रेतों का किया जा रहा दाह-संस्कार, 21 वीं सदी के वैज्ञानिक युग में हो रहा प्रेतबाधा निवारण … यहाँ न तो तंत्र का जोर चलता है न ही मन्त्र का … चलता है तो सिर्फ एक अदृश्य शक्ति का पावर … यहाँ न तो ओझाओं की ओझई काम आती है और न ही तांत्रिको का भस्माविक फूंक …. माँ अष्टभुजी के धाम पर आते ही नाचने लगते है भूत ….प्रस्तुत है औरंगाबाद के विभिन्न धार्मिक स्थलों से नाचते , गाते एवं हवनकुंडो में कूदते इंसानी भूतो की एक रिपोर्ट …….


महिला और पुरुष किसी भक्ति गीत पर भक्ति भाव में नहीं झूम रहे, बल्कि इन्हें भूतों ने अपने आगोश में ले रखा है । औरंगाबाद जिले में यह नजारा है जो दशहरा के मौके पर उतर से दक्षिण तक में लगे भूतना मेला का है और ऐसे मेले औरंगाबाद जिले के विभिन्न धार्मिक स्थलों पर लगे है ….
साफ है कि 21 वीं सदी के वैज्ञानिक युग में भी विज्ञान पर अंधविश्वास हावी है और लोग प्रेतबाधा निवारण के नाम पर भूतना मेलों की शरण ले रहे है परंतु अंधविश्वासियों पर विज्ञान का कोई भी असर बेअसर है।

हालाकि प्रेत बाधा से ग्रसित लोग इस बात से इतेफाक नहीं रखते है की चिकित्सा विज्ञानं ऐसी स्थिति में कारगर नहीं है परन्तु चिकित्सा विज्ञानं के जानकार ऐसी चीजो को एक सिरे से नकारते है और यह भी कहते है की चिकित्सा विज्ञानं में हर प्रकार का इलाज संभव है …
बहरहाल प्रेतबाधा ग्रस्त मरीज और उनके परिजन ऐसे भूतना मेलों में शामिल होकर विज्ञान के चमत्कार को फीका साबित कर रहे है। ऐसे में जरूरत है भूतना मेला लगने वाले स्थलों पर शिविर लगाकर लोगों को झांड फूंक से इलाज की हकीकत बताने की। तभी 21 वीं सदी के वैज्ञानिक युग की सार्थकता साबित हो सकेगी।

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