August 17, 2022 9:06 pm

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रमजान के महीने में एक रात ऐसी भी है जो हजारों रातों से बेहतर : कलीम अख्तर

Focus News Ab Tak

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सीतामढ़ी ब्यूरो रिपोर्ट

रमजान एक पवित्र महीना है, जिसमें पूरे महीने मुस्लिम समुदाय रोजा रखते हैं। रमजान के रोजे 29 दिन भी हो सकता हैं या 30 भी हो सकता हैं। जिस रात पूरा चाँद दिख जाता है, उसी रात के अगले दिन ईद का त्यौहार मनाया जाता है। उक्त बातें जिकरा फाउंडेशन सीतामढ़ी के चेयरमैन कलीम अख्तर ने कही। उन्होंने कहा कि ईद का यह त्यौहार ईद-उल-फितर के नाम से जाना जाता है। यह त्यौहार मुस्लिमों का सबसे बड़ा त्योहार है। इस दिन सेवइयां बनाई जाती हैं, जो ईद का प्रमुख व्यंजन है। रमजान के महीने में 29 दिन या 30 दिन हम मुस्लिम लोग रोजा रखकर अपनी धार्मिक आस्था की पूर्ति करते हैं, क्योंकि रमजान के महीने को इस्लाम मजहब में पवित्र माना गया है।

कलीम अख्तर

इस्लाम मजहब की मान्यता के अनुसार इस महीने में जहन्नुम के दरवाजे बंद हो जाते हैं और जन्नत के दरवाजे खोल दिए जाते हैं।उन्होंने कहा कि रोजा रखने के लिए सुबह सादिक सूरज उगने ( निकलने) से पहले सहरी करते हैं, उसके बाद पूरे दिन बिना खाए बिना पानी पिए रहते हैं और शाम सूर्यास्त के पश्चात इफ्तार के समय हो जाने पर रोजा खोलते हैं। यह क्रम पूरे रमजान के महीने में चलता है।
उन्होंने कहा कि यहीं वह पवित्र महीना है जिसमें कुरआन को उतारा गया। इसी महीने में एक रात ऐसी भी है जो हजारों रातों से बेहतर एत रात है। वह रात शब ए कद्र की रात है। शब ए कद्र की रात में बन्दा अल्लाह से जो दुआ करता है और जो मांगता है अल्लाह उसे देता है।

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